राजपाल यादव 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त से जुड़े मामले में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। अभिनेता ने चेक बाउंस के सात मामलों में कोर्ट से राहत की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को उन्हें कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर सरेंडर करने से अंतरिम छूट दी थी। इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को रखी की गई थी।
राजपाल यादव 5 करोड़ जमा करने की शर्त से जुड़े मामले में क्यों हैं?
यह मामला राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों का है। ये मामले मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वित्तीय विवाद से संबंधित हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के अपने आदेश में राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। अदालत ने सातों मामलों में तीन महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई और सजा को एक साथ चलाने का निर्देश दिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनकी याचिकाओं में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को इन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी थी
8 सितंबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजपाल यादव को सरेंडर करने से अंतरिम छूट दी थी। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। यह राहत इस शर्त के साथ दी गई थी कि याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करेंगे। कोर्ट ने मामले को 15 सितंबर को वापस सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था।
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| मामले से जुड़ी जानकारी | विवरण |
|---|---|
| अभिनेता | राजपाल नौरंग यादव |
| मामले | चेक बाउंस के 7 मामले |
| संबंधित कंपनी | मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड |
| दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश | 10 जुलाई 2026 |
| जेल की सजा | 3 महीने |
| सुप्रीम कोर्ट में जमा राशि | ₹5 करोड़ |
| अगली सुनवाई | 15 सितंबर 2026 |
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को सात चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था। कोर्ट ने सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद की सजा दी थी और निर्देश दिया था कि ये सजाएं एक साथ चलें। इसके अलावा प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें 1,04,75,000 रुपये शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में और 25,000 रुपये राज्य को देने थे।
हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, कार्यवाही के दौरान 2.25 करोड़ रुपये पहले ही शिकायतकर्ता को दिए और जारी किए जा चुके थे। अदालत ने शेष राशि की गणना करते समय इस भुगतान को समायोजित करने का निर्देश दिया था।
मामला किस विवाद से जुड़ा है?
चेक बाउंस के ये मामले राजपाल यादव की प्रोडक्शन कंपनी से जुड़े वित्तीय लेनदेन के विवाद से संबंधित हैं। यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और राजपाल नौरंग यादव व अन्य के बीच विवाद से जुड़ा है। मामला Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत दर्ज चेक बाउंस मामलों से संबंधित है।
इन मामलों में पहले निचली अदालत के स्तर पर कार्यवाही हुई और बाद में मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका यानी SLP दायर की। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका का मामला Rajpal Naurang Yadav and another v. M/s Murli Projects Pvt Ltd है और इसका SLP नंबर SLP(Crl) 16923/2026 है।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 15 सितंबर 2026 को सुनवाई के लिए रखा था। 8 सितंबर के आदेश के तहत 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर राजपाल यादव को सरेंडर से अंतरिम राहत दी गई थी। अब आगे की कार्यवाही इस बात से जुड़ी होगी कि अदालत उनकी याचिका और मामले में मौजूद वित्तीय तथा कानूनी मुद्दों पर क्या आदेश देती है।
इस मामले में 5 करोड़ रुपये की राशि को लेकर स्थिति को अलग-अलग चरणों में समझना जरूरी है। 8 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह रकम सरेंडर से अंतरिम छूट की शर्त के रूप में सामने आई थी। बाद की सुनवाई में अदालत के निर्देश अलग हो सकते हैं, इसलिए किसी भी नई राशि या समयसीमा को अदालत के ताजा आदेश के आधार पर ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
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राजपाल यादव का मामला क्यों चर्चा में है?
राजपाल यादव हिंदी सिनेमा के जाने-पहचाने अभिनेता हैं और उनका यह कानूनी मामला लंबे समय से चल रही चेक बाउंस कार्यवाही से जुड़ा है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका दाखिल हुई। शीर्ष अदालत की ओर से मिली अंतरिम राहत भी वित्तीय शर्त के साथ थी।
राजपाल यादव 5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त से जुड़ा यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर निर्भर है। 15 सितंबर की सुनवाई में अदालत मामले की याचिकाओं और राजपाल यादव की ओर से मांगी गई राहत पर आगे विचार कर सकती है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 5 करोड़ रुपये की राशि सरेंडर से मिली अंतरिम छूट की शर्त थी।
FAQ:
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| राजपाल यादव से सुप्रीम कोर्ट ने कितने रुपये जमा करने को कहा था? | 8 सितंबर 2026 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से अंतरिम छूट के लिए 5 करोड़ रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने की शर्त रखी थी। |
| राजपाल यादव का मामला किससे जुड़ा है? | यह मामला सात चेक बाउंस मामलों और मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वित्तीय विवाद से संबंधित है। |
| राजपाल यादव को कितनी जेल की सजा मिली है? | दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी और इन सजाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया था। |
| सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई कब थी? | 8 सितंबर के आदेश के अनुसार मामले को 15 सितंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। |
| क्या राजपाल यादव की दोषसिद्धि खत्म हो गई है? | उपलब्ध जानकारी के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखी थी और राजपाल यादव ने उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। |





