भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर वैश्विक अर्थशास्त्रियों का भरोसा बढ़ा है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के सितंबर 2026 के ताजा सर्वे के मुताबिक, भारत मजबूत विकास संभावनाओं वाले देशों में प्रमुख स्थान पर है। सर्वे में शामिल 98% अर्थशास्त्रियों ने अगले 12 महीनों में भारत में मध्यम या उससे बेहतर आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई है। वहीं, 74% अर्थशास्त्रियों को भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है।
मई 2026 के सर्वे में भारत में मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद जताने वाले अर्थशास्त्रियों का हिस्सा 52% था। सितंबर के सर्वे में यह बढ़कर 74% हो गया। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।
भारत की अर्थव्यवस्था क्यों मजबूत दिख रही है?
WEF के सर्वे के अनुसार, भारत की आर्थिक वृद्धि के पीछे घरेलू मांग एक महत्वपूर्ण आधार है। देश के भीतर मजबूत मांग वैश्विक आर्थिक झटकों के असर को कम करने में मदद कर सकती है। इसी वजह से वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की विकास संभावनाओं को लेकर अर्थशास्त्रियों का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है।
हालांकि, भारत के सामने कुछ जोखिम भी हैं। WEF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.7% रखा है। रिपोर्ट में बढ़ती ऊर्जा कीमतों को विकास की गति के लिए संभावित जोखिम बताया गया है। भारत की तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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WEF का यह सर्वे भारत के अप्रैल-जून तिमाही के आधिकारिक GDP आंकड़े जारी होने से पहले किया गया था। बाद में जारी आंकड़ों में उस तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि 7.8% दर्ज की गई।
चीन और यूरोप की तुलना में भारत का आर्थिक आउटलुक
WEF सर्वे में भारत और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच विकास के अनुमान में अंतर दिखाई देता है। चीन को लेकर अर्थशास्त्रियों का नजरिया कमजोर हुआ है। करीब एक-तिहाई विशेषज्ञों ने चीन में कमजोर आर्थिक वृद्धि की आशंका जताई।
यूरोप को लेकर भी अर्थशास्त्रियों का नजरिया अपेक्षाकृत कमजोर रहा। सर्वे में 61% अर्थशास्त्रियों ने अगले 12 महीनों में यूरोप की आर्थिक वृद्धि कमजोर या बहुत कमजोर रहने की उम्मीद जताई।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी बढ़ा भरोसा
सितंबर 2026 के सर्वे में वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी अर्थशास्त्रियों का नजरिया मई की तुलना में बदला है। 56% अर्थशास्त्रियों ने उम्मीद जताई कि अगले 12 महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर रहेगी या उसमें सुधार होगा।
मई 2026 में 89% विशेषज्ञों ने वैश्विक आर्थिक स्थिति में गिरावट की आशंका जताई थी। हालांकि, वैश्विक जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं। करीब 97% अर्थशास्त्रियों ने भू-राजनीतिक संघर्षों को अगले एक साल के लिए अनिश्चितता का प्रमुख स्रोत माना।
विकास की उम्मीदों के बीच कारोबारी माहौल की रैंकिंग घटी
WEF सर्वे में भारत के आर्थिक आउटलुक और कारोबारी माहौल को लेकर अलग-अलग संकेत मिले हैं। भारत अनुकूल कारोबारी माहौल के मामले में मई 2026 में दूसरे स्थान पर था, लेकिन सितंबर के सर्वे में यह चौथे स्थान पर आ गया।
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बहुराष्ट्रीय कंपनियों की पसंद के मामले में भी भारत का हिस्सा घटा। मई में 56% उत्तरदाताओं ने भारत को अपनी पसंदीदा टॉप-3 कारोबारी जगहों में शामिल किया था। सितंबर में यह आंकड़ा घटकर 40% रह गया।
WEF सर्वे के मुख्य आंकड़े
| आंकड़ा | सितंबर 2026 |
|---|---|
| भारत में मजबूत/बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद | 74% |
| भारत में मध्यम या बेहतर वृद्धि की उम्मीद | 98% |
| मई 2026 में मजबूत/बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद | 52% |
| FY 2026-27 के लिए भारत GDP वृद्धि अनुमान | 6.7% |
| यूरोप में कमजोर वृद्धि की उम्मीद | 61% |
| भू-राजनीतिक संघर्षों को जोखिम मानने वाले अर्थशास्त्री | 97% |
| वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्थिर/बेहतर रहने की उम्मीद | 56% |
FAQ:
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| WEF सर्वे के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि का क्या अनुमान है? | WEF सर्वे में 74% अर्थशास्त्रियों ने भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई है, जबकि 98% ने मध्यम या उससे बेहतर वृद्धि का अनुमान लगाया है। |
| भारत की GDP वृद्धि का WEF अनुमान कितना है? | WEF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.7% रखा है। |
| भारत की आर्थिक मजबूती का मुख्य आधार क्या है? | WEF सर्वे के अनुसार, भारत की मजबूत घरेलू मांग आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार है। |
| चीन और यूरोप की आर्थिक स्थिति कैसी है? | सर्वे में चीन के प्रति अर्थशास्त्रियों का नजरिया कमजोर हुआ है, जबकि यूरोप के लिए 61% अर्थशास्त्रियों ने कमजोर या बहुत कमजोर आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई है। |
| भारत की आर्थिक वृद्धि के सामने प्रमुख जोखिम क्या हैं? | ऊंची ऊर्जा कीमतें, भू-राजनीतिक संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भारत की विकास दर के लिए प्रमुख जोखिम माने जा रहे हैं। |




