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सोडियम बैटरी रेस: चीन पश्चिमी कंपनियों से आगे

सोडियम बैटरी रेस: चीन पश्चिमी कंपनियों से आगे

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Aakash Dwivedi

September 21, 2026 - 1:22 PM

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September 21, 2026 - 1:22 PM

Sodium battery race as China leads global sodium-ion battery production

 

सोडियम-आयन बैटरी तकनीक की वैश्विक दौड़ में चीन ने एक बड़ी छलांग लगाई है। लिथियम-आयन बैटरी के विकल्प और पूरक के रूप में देखी जा रही इस तकनीक के उत्पादन और विकास में चीन अब पश्चिमी देशों से काफी आगे निकल चुका है।

फाइनेंशियल टाइम्स द्वारा साझा किए गए CRU के आंकड़ों के मुताबिक, चीन में सोडियम-आयन गीगाफैक्ट्री की क्षमता 400 GWh के पार पहुंच गई है, जबकि चीन के बाहर यह आंकड़ा महज 11 GWh के आसपास है। यह अंतर बताता है कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के मामले में चीन की स्थिति कितनी मजबूत है।

चीन की रणनीति और बढ़ता वर्चस्व

चीनी दिग्गज कंपनियां जैसे CATL और BYD इस तकनीक को बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप देने में जुटी हैं। वाहन निर्माता कंपनी Changan भी CATL की सोडियम-आयन बैटरियों का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक कारें तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।

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इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत इसकी सामग्री की उपलब्धता है। लिथियम के विपरीत, सोडियम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और इसे समुद्री जल से भी प्राप्त किया जा सकता है। इससे देशों को अपनी बैटरी सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने का मौका मिल सकता है।

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, चीनी कंपनियों को सरकारी समर्थन और टैक्स इंसेंटिव से भी फायदा मिला है। इसके मुकाबले पश्चिमी बैटरी स्टार्टअप्स को पर्याप्त फंडिंग जुटाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

पश्चिमी देशों की चुनौतियां और कुछ उम्मीदें

अमेरिका और यूरोप की कंपनियां भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, लेकिन उनका मैन्युफैक्चरिंग स्केल चीन के मुकाबले काफी छोटा है। कई पश्चिमी स्टार्टअप्स के लिए राह आसान नहीं रही है। उदाहरण के तौर पर अमेरिकी कंपनी Natron Energy और स्टैनफोर्ड से जुड़ी Bedrock Materials ने अपने संचालन बंद कर दिए।

हालांकि, कुछ कंपनियां अभी भी इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। जनरल मोटर्स (GM) ने कैलिफोर्निया की Peak Energy के साथ साझेदारी की है। इसका लक्ष्य 2028 तक सोडियम-आयन बैटरी का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना है।

फ्रांस की Tiamat Energy और जर्मनी की Moll Batterien भी सोडियम-आयन बैटरी तकनीक पर काम कर रही हैं। वहीं, अमेरिकी कंपनी Alsym Energy को हाल के महीनों में 19 GWh के कमर्शियल कमिटमेंट मिलने की जानकारी सामने आई है।

क्या है सोडियम-आयन बैटरी की खासियत और सीमाएं?

सोडियम-आयन बैटरी में रुचि बढ़ने के प्रमुख कारणों में इसकी संभावित कम लागत, सामग्री की उपलब्धता और सुरक्षा से जुड़े फायदे शामिल हैं। ये बैटरियां अत्यधिक तापमान में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

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Changan के आंकड़ों के अनुसार, माइनस 20 डिग्री सेल्सियस पर सोडियम-आयन बैटरियां पारंपरिक लिथियम बैटरियों के मुकाबले 6% तेजी से और माइनस 10 डिग्री सेल्सियस पर 21% तेजी से चार्ज हो सकती हैं।

हालांकि, इस तकनीक की एक बड़ी सीमा इसकी एनर्जी डेंसिटी है। सोडियम-आयन बैटरियां कुछ लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में कम ऊर्जा स्टोर करती हैं। इसका असर इलेक्ट्रिक वाहनों की ड्राइविंग रेंज पर पड़ सकता है।

इसी वजह से सोडियम-आयन बैटरी छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों, थ्री-व्हीलर्स, एनर्जी स्टोरेज और बैकअप पावर जैसे क्षेत्रों में ज्यादा उपयोगी हो सकती है, जहां अधिकतम एनर्जी डेंसिटी सबसे बड़ी प्राथमिकता नहीं होती।

सोडियम बैटरी की लागत में आ सकती है गिरावट

सोडियम-आयन बैटरी की लागत भी आने वाले वर्षों में इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकती है। UBS के अनुमान के अनुसार, सोडियम-आयन बैटरी 2027 तक लिथियम-आयन बैटरी के साथ लागत की बराबरी कर सकती है। फाइनेंशियल टाइम्स द्वारा साझा किए गए अनुमान के मुताबिक, 2030 तक सोडियम-आयन सेल की लागत में 30% तक की कमी आ सकती है।

एनर्जी स्टोरेज और डेटा सेंटर कंपनियों के लिए भी यह तकनीक आकर्षक हो सकती है। इन क्षेत्रों में कम समय के लिए तेज बैकअप पावर की जरूरत होती है और हर स्थिति में लंबी अवधि की हाई-एनर्जी स्टोरेज क्षमता जरूरी नहीं होती।

सोडियम बैटरी में हार्ड कार्बन की भूमिका

सोडियम-आयन बैटरियों के एनोड के लिए हार्ड कार्बन का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए पेड़ों, नारियल के खोल और औद्योगिक उप-उत्पादों जैसे स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

फिनलैंड की Stora Enso यूरोप, अमेरिका और एशिया में साझेदारों के साथ लिग्निन आधारित हार्ड कार्बन का परीक्षण कर रही है। कंपनी स्वीडन की Altris के साथ भी इस क्षेत्र में काम कर रही है।

चीन पेटेंट और निवेश के मामले में भी आगे

सोडियम-आयन बैटरी से जुड़े पेटेंट गतिविधियों में भी चीन की मजबूत स्थिति सामने आई है। Volta Foundation की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में चीन इस क्षेत्र की पेटेंट गतिविधियों में सबसे आगे रहा और CATL सबसे सक्रिय आवेदकों में शामिल थी।

PitchBook के आंकड़ों के अनुसार, चीनी वेंचर कैपिटल समूह Shunwei Capital और Cowin Capital पिछले एक दशक में सोडियम-आयन बैटरी स्टार्टअप्स में सक्रिय निवेशकों में रहे हैं।

अमेरिका और यूरोप घरेलू सप्लाई चेन पर दे रहे जोर

अमेरिका और यूरोप चीन पर बैटरी सप्लाई के लिए निर्भरता कम करने के लिए घरेलू बैटरी सप्लाई चेन विकसित करने पर ध्यान दे रहे हैं। GM के बैटरी कारोबार की योजना में सोडियम-आयन बैटरियों के लिए जरूरी सामग्री को घरेलू या उत्तरी अमेरिकी स्रोतों से हासिल करना शामिल है।

यूरोप में भी स्थानीय स्तर पर सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। Stora Enso का लिग्निन आधारित हार्ड कार्बन प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक उदाहरण है।

क्या सोडियम-आयन बैटरी लिथियम-आयन की जगह लेगी?

सोडियम-आयन बैटरी के पूरी तरह लिथियम-आयन बैटरी की जगह लेने की संभावना कम मानी जा रही है। दोनों तकनीकों के अलग-अलग उपयोग हो सकते हैं। जहां लंबी रेंज और ज्यादा एनर्जी डेंसिटी जरूरी है, वहां लिथियम-आयन बैटरी की भूमिका बनी रह सकती है।

वहीं, एनर्जी स्टोरेज, छोटे इलेक्ट्रिक वाहन, बैकअप पावर और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में सोडियम-आयन बैटरी एक उपयोगी विकल्प बन सकती है। CATL और डच ऊर्जा कंपनी Alfen ने जुलाई में 2027 से यूरोप में 5 GWh के सोडियम-आयन बैटरी एनर्जी-स्टोरेज सिस्टम तैनात करने की घोषणा की थी।

बिजली की बढ़ती मांग, इलेक्ट्रिक वाहनों और डेटा सेंटरों के विस्तार के साथ सोडियम-आयन बैटरी के लिए नए बाजार बन सकते हैं। चीन फिलहाल उत्पादन क्षमता और शुरुआती औद्योगिक बढ़त में आगे है, जबकि अमेरिका और यूरोप घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवालजवाब
सोडियम-आयन बैटरी क्या है?सोडियम-आयन बैटरी एक रिचार्जेबल बैटरी तकनीक है, जिसमें लिथियम की जगह सोडियम आयनों का इस्तेमाल किया जाता है।
सोडियम-आयन बैटरी में कौन सा देश आगे है?उत्पादन क्षमता और औद्योगिक विकास के मामले में चीन फिलहाल काफी आगे है।
सोडियम-आयन बैटरी के क्या फायदे हैं?सोडियम की उपलब्धता, संभावित कम लागत, सप्लाई चेन में विविधता और कुछ परिस्थितियों में बेहतर तापमान प्रदर्शन इसके प्रमुख फायदे हैं।
सोडियम-आयन बैटरी की सबसे बड़ी कमी क्या है?इसकी एनर्जी डेंसिटी कुछ लिथियम-आयन बैटरियों की तुलना में कम होती है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की रेंज प्रभावित हो सकती है।
क्या सोडियम-आयन बैटरी लिथियम-आयन की जगह लेगी?सोडियम-आयन बैटरी के लिथियम-आयन को पूरी तरह बदलने के बजाय उसके पूरक के रूप में इस्तेमाल होने की संभावना है।
सोडियम-आयन बैटरी की लागत कब कम हो सकती है?UBS के अनुमान के अनुसार, सोडियम-आयन बैटरी 2027 तक लिथियम-आयन बैटरी के साथ लागत की बराबरी कर सकती है।
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