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कौन था पृथ्वी वल्लभ

कौन था पृथ्वी वल्लभ

हाल ही में 20 जनवरी से रात 9:30 बजे प्रसारित होने वाले धारावाहिक पृथ्वी वल्लभ (इतिहास भी रहस्य भी) के बारे में आप सभी लोगो ने सुना होगा। पर आप सभी आश्चर्यचकित अवश्य हो रहे होंगे की आखिर यह पृथ्वी वल्लभ कौन था।
और आप लोग यह जरूर जानना चाहते होंगे। हालांकि आप लोगो ने इतिहास को काफी पढ़ा होगा यह जानने कइ लिए की यह पृथ्वी वल्लभ है कौन? तो आप बिलकुल सही जगह पर आये हैं हम आपको बताएँगे पृथ्वी वल्लभ से जुडी हर बात।

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सोनी टीवी पर शुरू हुए कार्यक्रम पृथ्वी वल्लभ (इतिहास भी रहस्य भी) जिसमे अभिनेता आशीष शर्मा नायक पृथ्वी वल्लभ (मुंज) का रोल निभा रहे हैं। जिन्होंने चन्द्रगुप्त से काफी लोकप्रियता प्राप्त की और इसके बाद इन्होंने सिया के राम में राम का रोल निभाया। जबकि इस कार्यक्रम में अभिनेत्री सोनारिका भदौरिया नायिका मृणाल का रोल निभा रही हैं। इस कार्यक्रम में मुंज मालवा नरेश सिंहदत्त के गोद लिए पुत्र हैं और सिंह दत्त का छोटा पुत्र सिंधु राज है जो मुंज से नफरत करता है क्योंकि सिंहदत्त मुंज को राजा बनाना चाहते हैं।

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इस कार्यक्रम में मृणाल मान्यखेट की राजकुमारी हैं जो मालवा से अपने माँ बाप की हत्या का बदला लेने को उत्सुक है। पर भावनावश पृथ्वी वल्लभ और मुंज को प्रेम हो जाता है।

पृथ्वी वल्लभ एक साहित्य

पृथ्वी वल्लभ के एम मुंशी जी का एक साहित्य भी है जिसका प्रथम प्रकाशन 1966 में किया गया था। जो उस समय काफी लोकप्रिय हुआ था।

पृथ्वी वल्लभ एक फ़िल्म

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पृथ्वी वल्लभ के ऊपर एक फ़िल्म भी बन चुकी है। जो 1943 में ब्रिटिश भारत में रिलीज़ हुई थी जिसमे अभिनेता सोहराब मोदी मुंज की भूमिका में थे जबकि अभिनेत्री दुर्गा खोटे राजकुमारी मृणाल की भूमिका में थी।

पृथ्वी वल्लभ (मुंज) का नाम इतिहास में कविराज वाकपति राज के नाम से दर्ज है जो परमार वंश के एक प्रतापी शाशक थे। जिनका नाम इतिहास में सुनहरे शब्दों में लिखा है।

परमार वंश

परमार या पंवार वंश मध्यकालीन भारत का एक अग्निवंशी राजपूत राजवंश था। इस राजवंश का अधिकार धार और उज्जयिनी राज्यों तक था।और पूरे मध्यप्रदेश क्षेत्र में उनका साम्राज्य था। जब दैत्यों का अत्याचार बध गया तब चार ऋषिओं ने आबु पर्वत पर एक यज्ञ किया उस अग्निकुंड में से चार अग्निवंशी क्षत्रिय निकले। परमार ,चौहान ,सोलकी ,और प्रतिहार। उन्हीं के नाम पर उनका वंश चला। ऋषि वशिष्ठ की आहुति देने से एक वीर पुरुष निकला। जो अग्निकुंडसे निकलते समय मार-मार कि त्राड करता निकला और अग्निकुण्ड से बाहर आते ही पर नामक राक्षस का अंत कर दिया। एसा देखकर ऋषि वशिष्ठ ने प्रसन्न होकर उस वीर पुरुष को परमार नाम से संबोधित किया। उसी के नाम पर परमार वंश चला। परमार का अर्थ होता है। पर -यानी (पराया)शत्रु।मार का अर्थ होता है। मारना यानी शत्रु को मार गिराने वाला
परमार परिवार की मुख्य शाखा आठवीं शताब्दी के प्रारंभिक काल से मालवा में धार को राजधानी बनाकर राज्य करती थी। और इसका प्राचीनतम ज्ञात सदस्य उपेंद्र कृष्णराज था। इस वंश के प्रारंभिक शासक दक्षिण के राष्ट्रकूटों के सामंत थे। राष्ट्रकूटों के पतन के बाद सिंपाक द्वितीय के नेतृत्व में यह परिवार स्वतंत्र हो गया। सिपाक द्वितीय का पुत्र वाक्पति मुंज, जो 10वीं शताब्दी के अंतिम चतुर्थांश में हुआ, अपने परिवार की महानता का संस्थापक था। उसने केवल अपनी स्थिति ही सुदृढ़ नहीं की वरन्‌ दक्षिण राजपूताना का भी एक भाग जीत लिया और वहाँ महत्वपूर्ण पदों पर अपने वंश के राजकुमारों को नियुक्त कर दिया। उसका भतीजा भोज, जिसने सन्‌ 1000 से 1055 तक राज्य किया और जो सर्वतोमुखी प्रतिभा का शासक था, मध्युगीन सर्वश्रेष्ठ शासकों में गिना जाता था। भोज ने अपने समय के चौलुभ्य, चंदेल, कालचूरी और चालुक्य इत्यादि सभी शक्तिशाली राज्यों से युद्ध किया। बहुत बड़ी संख्या में विद्वान्‌ इसके दरबार में दयापूर्ण आश्रय पाकर रहते थे। वह स्वयं भी महान्‌ लेखक था और इसने विभिन्न विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखी थीं, ऐसा माना जाता है। उसने अपने राज्य के विभिन्न भागों में बड़ी संख्या में मंदिर बनवाए।

आबु चंद्रावती और मालवा उज्जैन ,धार परमार राजवंश का प्रमुख राज्य क्षेत्र रहा है। ये 8 वीं शताब्दी से 14 वीं शताब्दी तक शासन करते रहे।परमार वंशमे दो महान सम्राट हुए:

1. महान चक्रवर्ती सम्राट महाराजा विक्रमादित्य परमार
2. चक्रवर्ती महाराजा भोजदेव परमार।

कौन है मुंज पृथ्वी वल्लभ?

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राष्ट्रकूटों के पतन के बाद सिंपाक द्वितीय के नेतृत्व में यह परिवार स्वतंत्र हो गया। सिपाक द्वितीय का पुत्र वाक्पति मुंज, जो 10वीं शताब्दी के अंतिम चतुर्थांश में हुआ, अपने परिवार की महानता का संस्थापक था। उसने केवल अपनी स्थिति ही सुदृढ़ नहीं की वरन्‌ दक्षिण राजपूताना का भी एक भाग जीत लिया और वहाँ महत्वपूर्ण पदों पर अपने वंश के राजकुमारों को नियुक्त कर दिया।
मुंज संगीत कला का प्रेमी था और एक निपुण योद्धा था जिसको मान्यखेट की राजकुमारी मृणाल से प्रेम हो गया था और उसने मुंज को क़ैद करके धोखे से उसकी हत्या करवा दी थी।

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