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फ़िल्म पैडमेन का महाराष्ट्र में हुआ गहरा असर इतने सस्ते मिलेगे अब

फ़िल्म पैडमेन का महाराष्ट्र में हुआ गहरा असर इतने सस्ते मिलेगे अब

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आप सभी ने अक्षय कुमार की फ़िल्म पैडमेन देखी होगी जिसमे सस्ते नैपकिन को प्रोत्साहित किया गया है। अक्षय कुमार की यह पहल सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

महाराष्ट्र सरकार 8 मार्च को ‘अस्मिता योजना’ स्कीम शुरू करेगी

● महाराष्ट्र सरकार राज्य में छात्राओं और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को सस्ते दरों पर सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के लिए ‘अस्मिता योजना’ शुरू कर रही है।

● सस्ते दरों पर सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की यह योजना महाराष्ट्र सरकार अगले महीने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आठ मार्च से शुरू करेगी।

● इस योजना के तहत जिला परिषद स्कूलों की छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन 5 रुपये प्रति पैकेट जबकि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को यह 24 और 29 रुपये प्रति पैकेट की दर से उपलब्ध होगी।

● योजना को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और अभिनेता अक्षय कुमार लॉन्च करेंगे।

● अक्षय ने हाल ही में मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर सैनिटरी नैपकिन मशीन का अनावरण किया।

आप सभी ने अक्षय कुमार की फ़िल्म पैडमेन देखी होगी जिसमे सस्ते नैपकिन को प्रोत्साहित किया गया है। अक्षय कुमार की यह पहल सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

पैडमेन

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पैडमैन 2018 की भारतीय हिंदी जीवनी कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है जिसमें मुख्य भूमिकाओं में अक्षय कुमार, सोनम कपूर औरराधिका आप्टे हैं। अमिताभ बच्चनविशेष भूमिका निभाएंगे। यह फिल्म अरुणाचलम मुरुगनथम की वास्तविक जीवन की कहानी से प्रेरित है, जिन्होंने कम लागत वाले सैनिटरी पैड बनाने की मशीन का आविष्कार किया था। मुरुगनानथम ने एक ऐसी मशीन का निर्माण किया था जो सैनिटरी नैपकिन्स सस्ते दाम में उत्पादित करती थी। उनको इस आविष्कार के लिए पदम श्री से भी नवाजा गया था। ट्विंकल खन्ना भी इस फिल्म को प्रोडूस और निर्देशित कर रही है। ट्विंकल खन्ना की दूसरी किताब ‘डा लेजेंड ऑफ़ लक्ष्मी प्रसाद’ का आखिरी अध्याय इसी फिल्म से जुड़ा हुआ है।

सेनेटरी नैपकिन क्या होता है

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सेनेटरी नैपकिन या ‘स्वच्छता पैड’ (sanitary napkin, perineal pads या maternity pads) एक चपटी गद्दी होती है जिसे लड़कियों और महिला द्वारा मासिक धर्म के दौरान होने वाले रक्तस्राव के अवशोषण (सोखने) के लिए पहना जाता है। मासिक धर्म के अतिरिक्त इसे योनि की शल्य चिकित्सा के बाद स्वास्थ्य लाभ के समय, लोचिआ (जन्म देने के पश्चात जो खून बहता है), गर्भपात, या किसी भी अन्य की स्थिति में जहाँ योनि से होने वाले किसी भी प्रवाह को अवशोषित करना आवश्यक हो, के समय भी प्रयोग में लाया जाता है।
एक “सैनिटरी नैपकिन” या “सैनिटरी पैड” का अर्थ है एक ऐसा सोखने वाला पैड जिसे आप अपने मासिक धर्म के दौरान मासिक धर्म के रक्त को सोखने के लिए अपनी पैंटी के अंदर पहनती हैं। आपके मासिक स्राव और पसंद के आधार पर, एक उचित मोटाई, लंबाई और अवशोषण क्षमता वाले पैड को चुनें।

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एक सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करना आसान है। आपको निम्न कदमों को जानना आवश्यक है

● पैड के पीछे के कागज़ को हटाएँ और पैड को अपनी पैंटी में रखें

● विंग्स पर से कागज़़ हटाएँ। पैंटी के दोनों ओर विंग्स को लपेटें और उसे ज़ोर से दबाएँ

● पैड को कचरे के डिब्बे में फेंकने से पहले उसे कागज़़ में लपेटें

● पैड को शौचालय में न डालें क्योंकि इससे पैड नाली में फस जायेगा

याद रखें, आपके आराम के लिए और दुर्गंध से बचने के लिए आप केवल एक काम कर सकती हैं और वह है अपने पैड को प्रत्येक कुछ घंटों में बदलना।

कैसे बनाए जाते हैं बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स?

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ये नैपकिन्स Banana Fiber यानी केले के पेड़ के रेशे से बनाए जाते हैं। ये आसानी से इस्तेमाल के बाद नष्ट हो जाते हैं, सबसे खास बात नष्ट होते ही ये खाद और बायोगैस की तरह उपयोग में आ जाते हैं। इससे वायु में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा नहीं बढ़ती। वहीं, इससे उलट बाज़ार से महंगे दामों में मिलने वाले पैड्स प्लास्टिक फाइबर से बने होते हैं जो खुद नष्ट नहीं होते और अगर इन्हें जलाया जाए तो इनमें मौजूद कच्चा तेल (प्लास्टिक को जलाने पर निकलने वाला तरल) से हवा में कार्बन डाइ ऑक्साइड फैलती है, जिससे वायु दूषित होती है।

वहीं, बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स इस्तेमाल करने में भी बहुत मुलायम होते हैं और इनके इस्तेमाल से कैंसर और इंफेक्शन होने का खतरा भी नहीं होता।

यूएन की एनवायरनमेंट गुडविल एम्बेसडर बनीं दिया मिर्जा ने भी बताया कि वह पीरियड्स के दौरान सैनिटरी नैपकिन्स का इस्तेमाल नहीं करती हैं। क्योंकि पर्यावरण को ये बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। वह बायोडिग्रेडेबल नैपकिन्स का इस्तेमाल करती हैं, जो कि सौ प्रतिशत नैचुरल है। इसी वजह से उन्होंने कभी सैनिटरी नैपकिन्स का विज्ञापन नहीं किया।

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