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राजनीतिक चंदा मिलेगा अब चुनावी बांड से, नहीं होगा कालाधन

राजनीतिक चंदा मिलेगा अब चुनावी बांड से नहीं होगा कालाधन

भारत सरकार ने अब चुनावी चंदे की स्वच्छता व पारदर्शिता का अभियान छेड़ दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए नहीं चुनावी बांड योजना पेश की।
दान दाता यह बांड एस बी आई से खरीदी कर राजनीतिक दल को दान कर सकेंगे उनसे मिलने वाले चंदे की राशि राजनीतिक दल के बैंक खाते में जमा होगी।
लेकिन बांड पर दानदाता का नाम नहीं होगा। यानी दलों को गुप्त चंदा तो मिलेगा, लेकिन काले काले धन के रूप में अज्ञात श्रोत के रूप में नहीं मिल सकेगा।

बजट में ये घोषणा थी- वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को लोकसभा में बांड योजना का विस्तृत खाका पेश किया उन्होंने चुनावी बांड की योजना का विचार वित्त वर्ष 2017-18 फरवरी 2017 के आम बजट में इसकी घोषणा की थी।

अभी क्या होता है- चुनावी बांड का उद्देश्य मौजूदा नगद व गुप्त चंदे के चलन को रोकना है। 2016 में नोटबंदी के बाद यह एक दूसरा बड़ा कदम उठाया गया है। जेटली ने पिछले बजट में नगर चंदे की सीमा ₹20000 से घटाकर 2000 कर दी थी। लेकिन दलों को ऑनलाइन चंदा देने की इजाजत दी थी।

बांड क्या है- यह प्रॉमिसरी नोट से मिलता जुलता एक लिखित दस्तावेज होता है, लेकिन इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। बांड देने वाली बैंक दानदेता के फण्ड की तब तक संरक्षक होगी, जब तक की उसका भुगतान सम्बंधित दल के खाते में नहीं हो जाता। बांड के जरिये दानदाता अपने पसंद के दल को बैंकिंग संस्था के माध्यम से दान कर सकेंगे।

बांड होंगे एक हजार से एक करोड़ के गुणांक में
चुनावी बांड जारी होने के बाद स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की निर्धारित शाखाओं से एक हजार, दस हजार, एक लाख, और एक करोड़ के बांड खरीद कर राजनीतिक दलों को चंदा दे सकेंगे।

बांड की बिक्री
बांड की बिक्री साल के चार माहों जनवरी, अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर में दस दिनों के लिए होगी। इसी दौरान इन्हें खरीदा जा सकेगा। हालांकि आम चुनाव के समय बांड की खरीदी की सुबिधा तीस दिनों तक हो सकेगी।

वैधता रहेगी सिर्फ पंद्रह दिनों तक
चुनावी बांड की वैधता सिर्फ पंद्रह दिनों की होगी। ये जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 के तहत् मान्यता प्राप्त किसी भी दल को दान किये जा सकेंगे।

बांड योजना की ख़ास बातें
देश का कोई भी नागरिक या संस्था या कंपनी ये बांड खरीद सकती है।
बांड की खरीदी के लिए केवाईसी नियमों का पालन करना होगा।
भुगतान बैंक अकाउंट से ही हो सकेगा।
बांड पर भुगतान करने वाले का नाम नहीं होगा।

बांड योजना का उद्देश्य
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा की जब दानदाता ये बांड खरीदेगा तो उसकी बैलेंस शीट में इसका वर्णन होगा। इससे पता चलेगा की उसने स्वच्छ पैसा किसी दल को चंदा में दिया है। दानदाता को पता होगा कि उसने किस दल को चंदा दिया है, और दल चुनाव आयोग को रिटर्न भरकर देगा।

 

क्या आपके हिसाब से इस कदम से कालेधन पर लगान लगेगी ?

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