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मोदी का दावोस जाना भारत के लिए क्यों है खास जाने

मोदी का दावोस जाना भारत के लिए क्यों है खास जाने

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की बैठक 22 जनवरी से स्विटजरलैंड के शहर दावोस में शुरू हो रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी इस फोरम में हिस्सा लेंगे। 23 जनवरी को वे इसके अधिवेशन को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी 21 साल बाद दावोस जाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री देवगौड़ा दावोस समिट में शरीक हुए थे।

दावोस

दावोस स्विट्ज़रलैंड की एक तहसील है। यह प्राटिगाउ जिले में स्थित है। इस कस्बे की स्थिति लैंड वासर नदी के तट पर, स्विस आल्प्स पर्वत के प्लेसूर शृंखला और अल्बूला शृंखला के बीच स्थित है।1,560 मीटर (5,118 फी॰) की ऊंचाई पर, ये यूरोप का सबसे ऊंचा शहर है।

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वर्ल्ड इकनोमिक फोरम क्या है?

विश्व आर्थिक फोरम स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका मुख्यालय जिनेवा में है। स्विस अधिकारीयों द्वारा इसे एक निजी-सार्वजनिक सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। इसका मिशन विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी लोगों को एक साथ ला कर वैशविक, क्षेत्रीय और औद्योगिक दिशा तय करना है।

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वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम का इतिहास

इस फोरम की स्थापना 1971 में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम श्वाब द्वारा की गई थी। उस वर्ष यूरोपियन कमीशन और यूरोपियन प्रोद्योगिकी संगठन के सौजन्य से इस संगठन की पहली बैठक हुई थी। इसमें प्रोफेसर श्वाब ने यूरोपीय व्यवसाय के 444 अधिकारीयों को अमेरिकी प्रबंधन प्रथाओं से अवगत कराया था। वर्ष 1987 में इसका नाम विश्व आर्थिक फोरम कर दिया गया और तब से अब तक, प्रतिवर्ष जनवरी महीने में इसके बैठक का आयोजन होता है। प्रारम्भ में इन बैठकों में प्रबंधन के तरीकों पर चर्चा होती थी। प्रोफेसर ने एक मॉडल बनाया था जिसके अनुसार सफल व्यवसाय वही माना जाता था जिसमें अधिकारी अंशधारी और अपने ग्राहकों के साथ अपने कर्मचारी और समुदाय जिनके बीच व्यस्वसाय चलता है, उसका भी पूरा ख़याल रखते हैं। वर्ष 1973 में जब नियत विनिमय दर से विश्व के अनेक देश किनारा करने लगे और अरब-इजराइल युद्ध छिड़ने के कारण इस बैठक का ध्यान आर्थिक और सामाजिक मुद्दों की और मुड़ा और पहली बार राजनीतिज्ञों को इस बैठक के लिए निमंत्रित किया गया। रजनीतज्ञों ने इस बैठक को अनेक बार एक तटस्थ मंच के रूप में भी इस्तेमाल किया। 1988 में ग्रीस और तुर्की ने यहीं पर आपसी यूद्ध को टालने का एलान किया था। 1992 में रंगभेद नीति को पीछे रखते हुए, तत्कालीन दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति और नेल्सन मंडेला, जिन्होंने रंगभेद नीति के विरोध में जीवन पर्यन्त संगर्ष किया था, पहली बार सार्वजनिक रूप से एक साथ देखे गए थे। 1994 में इजराइल और पलेस्टाइन ने भी आपसी सहमति से मसौदे पर मुहर लगाई थी।

 

इसके सदस्य कौन होते हैं?

इस संस्था की सदस्यता अनेक स्तर पर होती है और ये स्तर उनकी संस्था के कार्य कलापों में सहभागिता पर निर्भर करती है। सदस्यता के लिए वह कंपनी चुनी जाती हैं जो विश्व भर में अपने उद्योग में अग्रणी होती हैं। अथवा किसी भौगोलिक क्षेत्र की प्रगति में अहम भूमिका निभा रही होती हैं। कुछ विकसित अर्थव्यवस्था या फिर विकसशील अर्थव्यवस्था में कार्यरत होतीे हैं।

दावोस सम्मलेन क्या है?

वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम की सर्वाधिक चर्चित घटना वार्षिक शीतकालीन बैठक में होती है जिसका आयोजन दावोस नामक स्थान पर किया जाता है। इस आयोजन में भागीदारी सिर्फ निमंत्रण से होती है और इसकी ख़ास बात यह है की इस छोटे शहर में भागीदार अनौपचारिक परस्पर बातचीत में अनेक समस्याओं का समाधान निकला जाता है। इस बैठक में लगभग 2400 लोग भाग लेते हैं जिसमें विश्व जगत के, अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ, गिने चुने बुद्धिजीवी और पत्रकार प्रमुख होते हैं। इसमें उन विषयों पर चर्चा होती है जिस पर विश्व समुदाय की चिंतन अत्यावश्यक मानी जाती है। उदहारण के लिए, 2012 में इस बैठक में “महान परिवर्तन: नए प्रतिरूप’, 2013 में ‘लचीला गतिशीलता’, 2014 में ‘विश्व का पुनर्निर्माण-समाज, राजनीति और व्यवसाय के लिए परिणाम’ और 2015 में “नए वैश्विक सन्दर्भ’ पर वार्षिक बैठक हुई थी। वर्ष 2007 में इस संस्था ने एक ग्रीष्मकालीन वार्षिक बैठक का आयोजन प्रारम्भ किया। इसका आयोजन चीन के दो शहरों के बीच बारी बारी से किया जाता है। इसमें लगभग 1500 सहभागी आते हैं। और वे अधिकतर तेजी से बढ़ते अर्थव्यवस्थाएं अर्थात चीन, भारत, रूस, मेक्सिको और ब्राज़ील- से आते हैं।

दावोस में भारत

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स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में पांच दिन तक चलने वाली इस 48वीं बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से कई नामी हस्तियां शिरकत कर रही हैं। भारत की ओर से पीएम मोदी समेत 130 लोग इसमें शामिल हो रहे हैं। इस साल का थीम ‘क्रिएटिंग ए शेयरड फ्यूचर इन ए फ्रैक्चर्ड वर्ल्ड’ है। इसमें बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, ऑस्ट्रेलियाई अभिनेत्री केट ब्लेन्चेट और संगीतकार एल्टन जॉन का सम्मान किया जाएगा। इस बार फोरम में भारतीय व्यंजन और योग का नजारा देखने को मिलेगा। दावोस में 20 भारतीय कंपनियां भी शिरकत कर रही हैं।

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