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मिल गया है कैंसर का इलाज ये रहा यहाँ

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4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया गया इसका प्रमुख कारण ये है कि आज के युग में कैंसर के विकराल समस्या है। आजकल काफी लोग कैंसर के पीड़ित पाये जाते हैं। लोगों में कैंसर होने का प्रमुख कारण तम्बाकू और धूम्रपान का अत्याधिक सेवन करना है। कई देशों में कैंसर का कई सालो से इलाज ढूंढा जा रहा है।

कैंसर

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कैंसर सभी उम्र के लोगों को, यहाँ तक कि भ्रूण को भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन अधिकांश किस्मों का जोखिम उम्र के साथ बढ़ता है। कैंसर में से 13% का कारण है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, 2007 के दौरान पूरे विश्व में 76 लाख लोगों की मृत्यु कर्कट के कारण हुई।कर्कट सभी जानवरों को प्रभावित कर सकता है।

लगभग सभी कैंसर रूपांतरित कोशिकाओं के आनुवंशिक पदार्थ में असामान्यताओं के कारण होते हैं। ये असामान्यताएं कार्सिनोजन या का कैंसरजन (कैंसर पैदा करने वाले कारक) के कारण हो सकती हैं जैसे तम्बाकू धूम्रपान, विकिरण, रसायन, या संक्रामक कारक कैंसर को उत्पन्न करने वाली अन्य आनुवंशिक असामान्यताएं कभी कभी DNA कैंसर (डीएनए) प्रतिकृति में त्रुटि के कारण हो सकती हैं, या आनुवंशिक रूप से प्राप्त हो सकती हैं और इस प्रकार से जन्म से ही सभी कोशिकाओं में उपस्थित होती हैं।

कैंसर की आनुवंशिकता सामान्यतया कार्सिनोजन और पोषक के जीनोम के बीच जटिल अंतर्क्रिया से प्रभावित होती है। कर्कट रोगजनन की आनुवंशिकी के नए पहलू जैसे DNA (डीएनए) मेथिलिकरण और माइक्रो RNA (आरएनए), का महत्त्व तेजी से बढ़ रहा है।

कर्कट में पाई जाने वाली आनुवंशिक असामान्यताएं आमतौर पर जीन के दो सामान्य वर्गों को प्रभावित करती हैं। कैंसर को बढ़ावा देने वाले अर्बुदजीन प्रारूपिक रूप से कैंसर की कोशिकाओं में सक्रिय होते हैं, उन कोशिकाओं को नए गुण दे देते हैं, जैसे सामान्य से अधिक वृद्धि और विभाजन, क्रमादेशित कोशिका मृत्यु से सुरक्षा, सामान्य उतक सीमाओं का अभाव और विविध ऊतक वातावरण में स्थापित होने की क्षमता।

इसके बाद गाँठ का शमन करने वाले जीन कैंसर की कोशिकाओं में निष्क्रिय हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन कोशिकाओं की सामान्य क्रियाओं में कमी आ जाती है, जैसे सही DNA (डीएनए) प्रतिकृति, कोशिका चक्र पर नियंत्रण, ऊतकों के भीतर अभिविन्यास और आसंजन और प्रतिरक्षा तंत्र की सुरक्षात्मक कोशिकाओं के साथ पारस्परिक क्रिया।

आम तौर पर इसके निदान के लिए एक रोग निदान विज्ञानीको एक उतक बायोप्सी नमूने का ऊतक वैज्ञानिक परीक्षण करना पड़ता है।

कैंसर के प्रकार

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कैंसर के 100 से अधिक प्रकार हैं। कैंसर के प्रकार का नाम ,आमतौर पर उन अंगों या ऊतकों के लिए नाम दिया जाता है ,जहां कैंसर शुरू होता हैं, लेकिन उन्हें उन कोशिकाओं के प्रकार के नाम से भी जाना जाता है जिनसे वो बनते है। ब्लैडर कैंसर स्तन कैंसर कोलोरेक्टल कैंसर किडनी कैंसर(रेनल सेल) ल्यूकेमिया यकृत कैंसर फेफड़ों का कैंसरलिम्फोमा अग्नाशय का कैंसर प्रोस्टेट कैंसर त्वचा कैंसरगलग्रंथि का कैंसर गर्भाशय का कैंसर

उपचार जो खोजा गया

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कैंसर के उपचार की संभावनाएं अब साकार होने लगी हैं और यह सम्भव है कि निकट भविष्य में बस एक वैक्सीन (टीके) के जरिये इसकी चिकित्सा की जा सकेगी। शोधकर्ताओं ने हाल ही में कैंसर पीड़ित चूहों पर एक वैक्सीन का टेस्ट किया।

इन शोधकर्ताओं ने चूहों के ट्यूमर के अंदर सीधे दो तत्वों तो इंजेक्ट किया, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई। माना जा रहा है कि ये चूहों के अंदर से हर तरह के कैंसर को खत्म करने में सक्षम है।

हाल ही में मनुष्यों में होने वाले लिम्फैटिक कैंसर (लिम्फोमा) के उपचार के लिए जनवरी में उन पर यह प्रयोग किया गया था। ‘साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन’ नाम की पत्रिका में छपे एक अध्ययन के अनुसार यह तरीका कई तरह के कैंसर पर काम करता है। शोधकर्ताओं का मानना है इस दवा का छोटा सा हिस्सा भी तेजी से कैंसर को खत्म कर सकेगा। इसमें खर्च भी काफी कम होगा और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा।

अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रोनाल्ड लेवी ने कहा कि इस दवा को देने से बहुत तेजी से शरीर से ट्यूमर खत्म होने लगता है। खास बात ये है कि इस विधि में पूरे शरीर नहीं, बल्कि बस ट्यूमर के अंदर की कोशिकाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय कर दिया जाता है। लेवी ने कहा इस दवा के जरिये चूहों में हमें ग़ज़ब के परिणाम दिखे. उनके पूरे शरीर से ट्यूमर खत्म हो गया था।

आमतौर पर कैंसर इम्यून सिस्टम की जानकारी में एक अजनबी या बाहरी तत्व की तरह रहता है। इम्यून कोशिकाएं खासकर T कोशिकाएं कैंसर में मौजूद इन अलग तरह की कोशिकाओं की पहचान कर लेती हैं और उन्हें खत्म करने की कोशिश में लग जाती हैं।

हालांकि ये कैंसर को खत्म करने में सफल नहीं हो पातींं और ट्यूमर बढ़ता जाता है। लेकिन कैंसर की ये दवा जब ट्यूमर में इंजेक्ट की जाती है तो वो इन T कोशिकाओं को फिर से सक्रिय कर देती है, जिससे कैंसर को खत्म करने में मदद मिलती है।

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