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भगवान शिव के इन गुणों को अपनाएंगे तो आपका जीवन सफल हो जाएगा।

भगवान शिव के इन गुणों को अपनाएंगे तो आपका जीवन सफल हो जाएगा।

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भगवान शिव को डिवॉन का देव महादेव ऐसे ही नहीं कहा जाता। एक पल में शिव भोले भंडारी बन जाते हैं तो दुसरे ही पल शिव का रुद्र रूप सामने आता है और भयंकर तांडव देखने को मिलता है।

भगवान शिव के जीवन के कई सारे पहलूँ हैं। उनके कई अवतार अवतरित हो चुके हैं और प्रत्येक अवतार में कोई ना कोई ऐसा गुण होता ही है जिसको हम आत्मसात करके अपना जीवन सफल बना सके।

शिव या महादेव हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण देवताओं में से एक है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ,गंगाधार के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे भैरव के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वेद में इनका नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। इनकी अर्धांगिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है। इनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश हैं, तथा पुत्री अशोक सुंदरी हैं। शिव अधिक्तर चित्रों में योगी के रूप में देखे जाते हैं और उनकी पूजा शिवलिंग तथा मूर्ति दोनों रूपों में की जाती है। शिव के गले में नाग देवता विराजित हैं और हाथों में डमरू और त्रिशूल लिए हुए हैं। कैलाश में उनका वास है। यह शैव मत के आधार है। इस मत में शिव के साथ शक्ति सर्व रूप में पूजित है।

भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं। शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं।

शिव के अवतार

हिन्दू धर्म में भगवान शिव को अनेक नामों से पुकारा जाता है

  • रूद्र – रूद्र से अभिप्राय जो दुखों का निर्माण व नाश करता है।
  • पशुपतिनाथ – भगवान शिव को पशुपति इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह पशु पक्षियों व जीवआत्माओं के स्वामी हैं
  • अर्धनारीश्वर – शिव और शक्ति के मिलन से अर्धनारीश्वर नाम प्रचलित हुआ।
  • महादेव – महादेव का अर्थ है महान ईश्वरीय शक्ति।
  • भोला – भोले का अर्थ है कोमल हृदय, दयालु व आसानी से माफ करने वाला। यह विश्वास किया जाता है कि भगवान शंकर आसानी से किसी पर भी प्रसन्न हो जाते हैं।
  • लिंगम – पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक है
  • नटराज – नटराज को नृत्य का देवता मानते है क्योंकि भगवान शिव तांडव नृत्य के प्रेमी है। “शिव” शब्द का अर्थ “शुभ, स्वाभिमानिक, अनुग्रहशील, सौम्य, दयालु, उदार, मैत्रीपूर्ण” होता है। लोक व्युत्पत्ति में “शिव” की जड़ “शि” है जिसका अर्थ है जिन में सभी चीजें व्यापक है और “वा” इसका अर्थ है “अनुग्रह के अवतार”। ऋग वेद में शिव शब्द एक विशेषण के रूप में प्रयोग किया जाता है, रुद्रा सहित कई ऋग्वेदिक देवताओं के लिए एक विशेषण के रूप में। शिव शब्द ने “मुक्ति, अंतिम मुक्ति” और “शुभ व्यक्ति” का भी अर्थ दिया है।  इस विशेषण का प्रयोग विशेष रूप से साहित्य के वैदिक परतों में कई देवताओं को संबोधित करने हेतु किया गया है। यह शब्द वैदिक रुद्रा-शिव से महाकाव्यों और पुराणों में नाम शिव के रूप में विकसित हुआ, एक शुभ देवता के रूप में, जो “निर्माता, प्रजनक और संहारक” होता है।
  • “महाकाल” अर्थात समय के देवता, यह भगवान शिव का एक रूप है जो ब्राह्मण के समय आयामो को नियंत्रित करते है।

शिव के कुछ गुण

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● बुराई का नाश करना शिव का एक गुण है। वो सही समय पर राक्षसो का अंत करके इस पृथ्वी को बुराई से मुक्त करते हैं। इस तरह हमको भी बुराई का डटकर सामना करना चाहिए।

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● खुद पर संयम होना भगवान शिव का एक गुण है। भगवान शिव हिमालय पर निवास करते हैं। और भोग विलास से दूर रहते हैं। इस तरह हम भी खुद पर संयम करके अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

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● नकारात्मकता को दूर करना भी शिव का एक गुण है। विषपान करके उन्होंने एक बार इस संसार से नकारात्मकता का नाश किया था। इसी तरह हम लोगों को भी नकारात्मक विचारों का नाश करना चाहिए।

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● अहंकार को काबू में रखना भी शिव का एक गुण है। परम शक्तिमान देवों के देव महादेव होने के बाद भी भगवान शिव ने कभी अभिमान नहीं किया। इसी तरह हम भी अभिमान को खुद से दूर रखकर अपने लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

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● महाज्ञानी शिव ने हमेशा अपने ज्ञान से लोगों के मनो का अन्धकार का नाश किया है। इसी तरह आप भी अपने ज्ञान का सदुपयोग करके अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। और अपने ज्ञान के प्रकाश को दसों दिशाओं में फैला सकते हैं।

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● विनम्रता भी शिव का एक गुण है। सर्वशक्तिमान होकर भी शिव सदैव विनम्र रहते हैं। और अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। आप भी विनम्र रहकर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

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