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बुलेट ट्रेन के बाद अब चलेगी हवा से बात करने वाली ट्रेन सोचते ही पहुँच जाओगे दूसरी जगह

बुलेट ट्रेन के बाद अब चलेगी हवा से बात करने वाली ट्रेन सोचते ही पहुँच जाओगे दूसरी जगह

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हाई-स्पीड ट्रेन का सपना देख रहे भारत में बुलेट ट्रेन से भी तेज स्पीड की ट्रेन दौड़ सकती है। चीन, जापान में चलने वाली बुलेट ट्रेनों से भी तेज होगी भारत में चलने वाली हाइपरलूप ट्रेन। हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट के ट्रायल के मामले में भारत तमाम बड़े देशों से आगे निकल सकता है। इस ट्रेन से मुंबई से पूणे का सफर महज 25 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह बुलेट ट्रेन से भी तेज चलती है।

हवाईजहाज से भी तेज है इस ट्रेन की स्पीड

हवाईजहाज की स्पीड से भी तेज यह ट्रेन ‘हाइपरलूप ट्यूब’ के भीतर कम दबाव वाले क्षेत्र में चलेगी। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बुलेट ट्रेन से दोगुनी रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन चुंबकीय तकनीक से लैस पॉड (ट्रैक) पर चलेगी। यह ट्रेन वैक्यूम (बिना हवा) ट्यूब सिस्टम से गुजरने वाली कैप्सूल जैसी हाइपरलूप 750 मील (1224 किलोमीटर) प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है।

एक ‘हाइपरलूप’ पॉड में 6 से 8 लोग सफर कर सकते हैं। फिलहाल मुंबई से पुणे के बीच इसे चलाए जाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। एक अंदाज के मुताबिक अगर मुंबई-पुणे के बीच हाइपरलूट ट्रेन दौड़ती है तो ये सफर महज 25 मिनट का रह जाएगा।

मुंबई-पुणे के बीच हाइपरलूप प्रॉजेक्ट के लिए वर्जिन ग्रुप ने महाराष्ट्र सरकार के साथ समझौता किया

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मुंबई-पुणे को हाइपरलूप से जोड़ने के लिए अमेरिकी कंपनी वर्जिन ग्रुप ने महाराष्ट्र सरकार के साथ इंटेंट अग्रीमेंट साइन करने की घोषणा की है। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक से 1000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से सफर किया जा सकता है और मुंबई-पुणे के बीच सफर महज 13 मिनट में पूरा हो जाएगा।इसमें हर साल 15 करोड़ यात्री सफर कर पाएंगे। नवंबर 2017 में महाराष्ट्र सरकार ने इस रूट पर सर्वे के लिए कंपनी के साथ करार किया था। इससे पहले आंध्र प्रदेश सरकार ने विजयवाड़ा और अमरावती शहरों को हाइपरलूप से जोड़ने के लिए अमेरिकी कंपनी हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नॉलजीज (एचटीटी) समझौता किया था। दोनों शहरों के बीच की एक घंटे की यात्रा घटकर केवल 5-6 मिनट की रह जाएगी।इस समय सयुंक्त अरब अमीरात, अमेरिका, कनाडा, फिनलैंड और नीदर लैंड में भी हाइपरलूप पर काम हो रहा है।

क्या होता है हायपर लूप?

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हाइपरलूप ट्रेन चुंबकीय शक्ति पर आधारित तकनीक है।जिसके अंतर्गत खंभों के ऊपर (एलीवेटेड) पारदर्शी ट्यूब बिछाई जाती है। इसके भीतर बुलेट जैसी शक्ल की लंबी सिंगल बोगी हवा में तैरते हुए चलती है। इसमें घर्षण नहीं होता है इसलिए इसकी गति 1200 किलोमीटर/घंटा से भी अधिक हो सकती है।

विशेषतायें

● विद्युत् खर्च न्यूनतम- हायपर लूप ट्रेन के संचालन में विद्धुत खर्च बहुत कम आता है क्योंकि ये ट्रेन मैग्नेटिक फ़ोर्स से चलती है।

● घर्षण रहित संचालन- हायपर लूप ट्रेन एक तरह के तुबे में चलती हैं जिससे इनके संचालन में घर्षण नहीं होता है। इसीलिए इसका सुगमता से घर्षण रहित संचालन होता है।

● यात्री एवं माल परिवहन में सालाना 15 फीसद बढ़ोतरी- ऐसा देखा गया है। की जब हायपर लूप ट्रेन का संचालन होता है तो यात्री कम समय में अपने गंतव्य तक सुगमता से पहुँच जाते हैं। और माल भी सुगमता से अपने गंतव्य तक पहुँचाया जाता है। हायपर लूप ट्रेन के संचालन से परिवहन में करीब 15 फीसदी बढ़ने के अवसर हैं।

फिलहाल यह योजना अभिकल्पना के स्तर पर है। इसे व्यावहारिक शक्ल दिया जाना बाकी है।

हायपर लूप ट्रेन संचालन करने वाली कंपनियां

● हाईपरलूप वन: इस तकनीक में अग्रणी कम्पनी है।

● डिनक्लिक्स ग्राउंडव‌र्क्स कंपनी

● ऐकॉम

● लक्स हाइपरलूप नेटवर्क

● हाइपरलूप इंडिया

● इंफी-अल्फा

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