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बजट

बात आपके बजट की

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केंद्र सरकार के इस कार्यकाल के अंतिम आम बजट में गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। बजट में सरकार ने गरीबों पर फायदों की बौछार कर दी तो वहीं मीडिल क्लास को निराश किया है। बजट में कई वस्तुएं और सेवा महंगी की गई है। सस्ती वस्तुओं और सेवा का सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा तो वहीं महंगी हुई चीजें जेब पर भारी पड़ेगी। आखिर वह क्या चीजें हैं जो महंगी हुई और क्या सस्ती हुई। आइए तस्वीरों में देखिए वे क्या-क्या चीजें हैं।

हर बजट के बाद लोगों को इस बात में दिलचस्पी रहती है कि क्या महंगा हुआ और क्या सस्ता।

● लेकिन जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स सिस्टम लागू होने के बाद कम ही चीज़ें ऐसी हैं जिनकी क़ीमत पर इस बजट से ज्यादा असर पड़ा है।

● वैसे कस्टम और एक्साइज़ ड्यूटी की व्यवस्था अब भी लागू है, इसलिए जिन चीज़ों के मामले में इसमें बदलाव किए गए हैं, वहां इनकी क़ीमत पर फर्क पड़ सकता है।

● लंबे समय के बाद सरकार ने किसी बजट में सिगरेट की क़ीमत को लेकर अलग से कुछ नहीं कहा यानी सिगरेट की क़ीमत पर शायद कोई फर्क न पड़े।

● इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से आयातित सामान की क़ीमत बढ़नी तय है।

क्या महंगा हुआ?

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● सरकार ने बजट में पेडल कार, पहिये वाले खिलौने, गुड़िया, खेलों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और सिगरेट और अन्य लाइटर महंगे हुए हैं। सिगरेट सस्ती हुई या महंगी यह जानने के लिए लोग उत्सुक नजर आए। वहीं आम लोगों की दैनिक जीवन की चीजें जिनमें रेशमी कपड़े, हीरे, कृत्रिम आभूषण, स्मार्ट घड़ियां, वियरएबल उपकरण, इंपोर्टेड फर्नीचर, गद्दे, लैंप, स्कूटर भी महंगे हुए हैं।

● मोबाइल फोन पर कस्टम ड्यूटी 15 फ़ीसदी से बढ़ाकर 20 फ़ीसदी कर दी गई है. स्मार्टवॉच, वियरेबल डिवाइस पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 20 फ़ीसदी कर दी गई है।

● बजट में टीवी के कुछ पुर्जों पर भी कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गई है. पहले ये दर 7.5 फ़ीसदी थी और 10 फ़ीसदी थी, इसे बढ़ाकर 15 फ़ीसदी कर दिया गया है।

● फल और सब्जियां, सोना, चांदी, चश्मे, परफ़्यूम, सौंदर्य प्रसाधन, ट्रकों और बसों के रेडियल टायर, रेशमी कपड़े, जूते, हीरे-जेवरात, एलसीडी/एलईडी टीवी पैनल महंगे हुए।

● लग्ज़री कारें और उनकी मशीनरी पर कस्टम ड्यूटी बढ़ी. फर्नीचर, गद्दे, ऑलिव ऑयल और मूंगफली जैसे खाद्य तेल, पतंग महंगे हुए।

क्या सस्ता हुआ?

● वहीं सरकार ने बजट में सस्ती हुई चीजों का भी ऐलान किया। जिनमें कॉक्लीअर इम्प्लांट, एक्सेसरीज, देश में तैयार हीरे, रेलवे टिकट (ई-टिकट) पर सर्विस टैक्स कम कर दिया गया है।  काजू और सोलर टेंपर्ड ग्लास शामिल हैं। काजू पर सीमा शुल्क 5 फीसदी  से घटाकर 2.5 फीसदी कर दिया गया है।

● एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद पेट्रोल और डीज़ल की कीमत दो रुपये प्रति लीटर कम हो गई है।

● कच्चा काजू, सोलर पैनल बनाने के काम आने वाला सोलर टेम्पर्ड ग्लास सस्ता हुआ।

मोदी सरकार के आने बाद रेल बजट को आम बजट के साथ मिला दिया गया। पहले रेल बजट अलग से पेश किया जाता था और पूरे देश की नज़रें, रेल किराये से लेकर नई ट्रेनों पर भी टिकी रहती थी।

इस साल रेल बजट में वित्त मंत्री ने रेलवे के विस्तार के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

रेल बजट खोया नहीं समा गया है”

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अपने भाषण में अरुण जेटली ने कहा, ”बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए सरकार वडोदरा में विशेष रेलवे युनिवर्सिटी खोलने की दिशा में क़दम बढ़ा रही है। इसके अलावा मुंबई रेल नेटवर्क के लिए 11,000 करोड़ रुपये और बेंगलुरु मेट्रो नेटवर्क के लिए 17,000 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा।”

वित्तमंत्री ने यह भी कहा कि मुंबई लोकल के दायरे में विस्तार किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि रेल बजट खोया नहीं आम बजट में समा गया है।

उन्होंने कहा, ”इनफ्रास्ट्रक्चर सरकार की ओर से किया जा रहा है। रेल, रोड, हवाई सफ़र सब को मिलाकर इन्होंने बजट रखा है। हर चीज़ के लिए अलग से नहीं है। रेल बजट के डॉक्यूमेंट्स ध्यान से देखेंगे तो सबकुछ मिलेगा।”

बजट भाषण में रेलवे की समस्याओं और आगे की योजनाओं का ज़िक्र न होने के बारे में वो कहते हैं, ”समस्याओं को लेकर रेलवे काम कर रहा है और बेशक उनका ज़िक्र बजट में होगा। बजट भाषण में इनका ज़िक्र न होने का मतलब ये नहीं है कि रेलवे के लिए पैसे कम दिये गए या फिर इसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।”

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