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देखें क्या क्या समझौते हुए ईरान से

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भारत, ईरान ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए 9 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए:

सुरक्षा, व्यापार एवं ऊर्जा के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 फरवरी 2018 को ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी से बातचीत की, जिसके बाद दोनों पक्षों ने नौ समझौतों पर दस्तखत किए जिसमें दोहरे कराधान से जुड़ा एक समझौता भी शामिल है। अपनी व्यापक बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की।

इन समझौतों से भारत और ईरान के बीच आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों में और गहराई आएगी। अफगानिस्तान और जम्मू कश्मीर में अस्थिरता और अशांति पैदा करने के लिये आतंकवादियों के इस्तेमाल का भी जिक्र भारत ने किया।

अफगानिस्तान मसले पर भी दोनों नेताओं के बीच गहन बातचीत हुई। दोनों ने कहा कि वे अफगानिस्तान की राष्ट्रीय एकता सरकार का समर्थन करते हैं। क्षेत्रीय यातायात सम्पर्क बढ़ाने के लिये भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच चल रहे सहयोग को औऱ तेज करने के संकल्प के साथ ही ईरान और भारत ने जमीनी सम्पर्क में किसी तरह की बाधा पैदा नहीं करने की बात की।

प्रमुख समझौते:

● दोहरा कराधान से बचने और करचोरी रोकने का समझौताराजनयिकों के लिये वीजा छूट पर समझौता

● प्रत्यर्पण संधि के दस्तावेज का आदान प्रदानचाबाहार के शाहिद बेहेस्ती बंदरगाह के पहले चरण को पट्टे पर देने का अनुबंधपारम्परिक औषधि में सहयोग का समझौता

● आपसी रुचि के क्षेत्रों में व्यापार संवर्द्धन के लिये विशेषज्ञ दल के गठन पर समझौता

● कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों में सहयोग का समझौतास्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग का समझौताडाक सहयोग पर समझौता

● ईरान ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका का समर्थन करेगा।

● रूहानी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की स्थायी सदस्यता के भारत के दावे का समर्थन किया।

मोदी और रूहानी के बीच हुई मुलाकात में ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में आए तनाव भी खत्म होने के आसार हैं। भारत ने पहले ही संकेत दे दिया है वह अगले वित्त वर्ष में ईरान से ज्यादा कच्चा तेल खरीदेगा। फरजाद-बी गैस ब्लॉक को खरीदने पर भी जल्द समाधान होने के आसार हैं।

इसी कड़ी में दोनों देशों ने पारंपरिक खरीददार-विक्रेता वाले संबंधों की बजाय दीर्घावधि रणनीतिक साझेदारी विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।

ईरान

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ईरान जंबुद्वीप (एशिया) के दक्षिण-पश्चिम खंड में स्थित देश है। इसे सन १९३५ तक फारस नाम से भी जाना जाता है। इसकी राजधानी तेहरान है और यह देश उत्तर-पूर्व में तुर्कमेनिस्तान, उत्तर में कैस्पियन सागर और अज़रबैजान, दक्षिण में फारस की खाड़ी, पश्चिम में इराक और तुर्की, पूर्व में अफ़ग़ानिस्तान तथा पाकिस्तान से घिरा है। यहां का प्रमुख धर्म इस्लाम है तथा यह क्षेत्र शिया बहुल है।

प्राचीन काल में यह बड़े साम्राज्यों की भूमि रह चुका है। ईरान को १९७९ में इस्लामिक गणराज्य घोषित किया गया था। यहाँ के प्रमुख शहर तेहरान, इस्फ़हान, तबरेज़, मशहदइत्यादि हैं। राजधानी तेहरान में देश की १५ प्रतिशत जनता वास करती है। ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्यतः तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात पर निर्भर है। फ़ारसी यहाँ की मुख्य भाषा है।

ईरान में फारसी, अजरबैजान, कुर्द और लूर सबसे महत्वपूर्ण जातीय समूह हैं

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ईरान का प्राचीन नाम फ़ारस था। इस नाम की उत्पत्ति के पीछे इसके साम्राज्य का इतिहास शामिल है। बेबीलोन के समय (4000-700 ईसापूर्व) तक पार्स प्रान्त इन साम्राज्यों के अधीन था। जब 550 ईस्वी में कुरोश ने पार्स की सत्ता स्थापित की तो उसके बाद मिस्र से लकर आधुनिक अफ़गानिस्तान तक और बुखारा से फारस की खाड़ी तक ये साम्राज्य फैल गया। इस साम्राज्य के तहत मिस्री, अरब, यूनानी, आर्य (ईरान), यहूदी तथा अन्य कई नस्ल के लोग थे। अगर सबों ने नहीं तो कम से कम यूनानियों ने इन्हें, इनकी राजधानी पार्स के नाम पर, पारसी कहना आरंभ किया। इसी के नाम पर इसे पारसी साम्राज्य कहा जाने लगा। यहाँ का समुदाय प्राचीन काल में हिन्दुओ की तरह सूर्य पूजक था यहाँ हवन भी हुआ करते थे लेकिन सातवीं सदी में जब इस्लामआया तो अरबों का प्रभुत्व ईरानी क्षेत्र पर हो गया। अरबों की वर्णमाला में (प) उच्चारण नहीं होता है। उन्होंने इसे पारस के बदले फारस कहना चालू किया और भाषा पारसी के बदले फ़ारसी बन गई। यह नाम फ़ारसी भाषा के बोलने वालों के लिए प्रयोग किया जाता था।

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