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दम है तो पहचान के बताओ

  1. दम है तो पहचान के बताओ
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आजकल कुछ किताबों को पढ़कर हर कोई खुद को जीनियस समझ ने लगता है।
अगर आपको लगता है की आप भी हैं जीनियस तो बताओ इस फ़ोटो में कितने जानवर हैं
अगर आप नहीं बता पाते हैं। तो आइये हम आपको बताते हैं कि इस फ़ोटो में कितने जानवर हैं।

अगर आप नहीं समझ पाये हैं की इस फ़ोटो में कितने जानवर हैं तो हम आपको बताएँगे की इस फ़ोटो में कितने जानवर है।

थोडा सब्र तो रखिये जनाब एक बार ध्यान से देखिये आपको फ़ोटो में थोडा दिमाग लगाने की जरुरत है और आप खुद पहचान लेंगे।

पहला जानवर

क्या दिखा आपको, मेरे ख्याल से आपको सबसे पहले लकड़बग्घा दिखा होगा जो फ़ोटो में सबसे ऊपर है बायीं तरफ है ना। देखिये इस फ़ोटो में लाल घेरे में

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दोस्तों अब आपको लकड़बग्घा दिख ही गया तो हम आपको लकड़बग्घा के बारे में कुछ जानकारी भी दे ही देते हैं।

लकड़बग्घा

लकड़बग्घा, हाइयेनिडी कुल से संबंधित एक मांसाहारी स्तनधारी जीव है। इसका प्राकृतिक आवास एशिया और अफ्रीका दोनो महाद्वीप हैं। वर्तमान काल में इसकी निम्न चार जीवित प्रजाति अस्तित्व में हैं।

  • धारीदार लकड़बग्घा
  • भूरा लकड़बग्घा
  • धब्बेदार लकड़बग्घा
  • कीटभक्षी लकड़बग्घा

लकड़बग्घा विचित्र जंगली प्राणी है। वह विभिन्न प्रकार की बोलियाँ बोलता है। उसका ठहाका बहुत प्रसिद्ध है। आमतौर पर अच्छा भोजन पाकर वह अचानक ही जोर से ठहाका लगाता है। वन विशेषज्ञ मैथ्यूज ने लिखा है, “हरिद्वार के वनों में मैंने लकड़बग्घे के ठहाके बहुत सुने हैं। चाँदनी रात में वनों में ये ऐसे अट्टाहास करते हैं जैसे कोई पागल आपे से बाहर होकर बार-बार हँस रहा हो। थोड़ी-थोड़ी देर के बाद कहकहों से शान्त वायुमण्डल गूँज उठता है।”

वनों में पर्यावरण की रक्षा में लकड़बग्घे का बहुत योगदान है। ये वनों के चक्कर लगाते रहते हैं। बीमारी से मरे जानवरों को शिकारी पशु नहीं खाते परन्तु ये बड़े सफाई से उन्हें चट कर जाते हैं। बाघ जाति के जानवर अपने शिकार का कुछ भाग खाते हैं और कुछ सड़ने के लिये छोड़ देते हैं। उस बदबूदार माँस का भक्षण लकड़बग्घे करते हैं। वन में लगे कैम्पों तथा घरों से बाहर फेंकी हुई जूठन और हड्डियों के टुकड़ों को खाने के लिये ये रात में आ जाते हैं। छोटे-छोटे टुकड़ों के लिये ये आपस में खूब लड़ते हैं इसीलिये इसे मैदानों और जंगलों की ‘गन्दगी साफ करने वाला क्रियाशील सफाईकर्मी’ कहा जाता है।

दूसरा जानवर

दोस्तों अब बारी है दुसरे जानवर के बारे में बताने की वैसे आपने अब तक पहचान लिया होगा। फिर भी अगर अपने नहीं पहचान पाया तो चिंता मत कीजिए हम आपको बता रहे हैं कि दूसरा जानवर खरगोश है जिसको आप इस फ़ोटो लाल घेरे में देख सकते हैं।

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दोस्तों अब आपको लाल घेरे में नन्हा सा खरगोश नजर आ ही गया होगा तो हम आपको कुछ दिलचस्प तथ्य बताते है इस खरगोश के बारे में।

खरगोश

खरगोश, लेपोरिडी परिवार का एक छोटा स्तनपायी है, जो विश्व के अनेक स्थानों में पाया जाता है। विश्व में खरगोश की आठ प्रजातियाँ पायी जाती हैं। खरगोश जंगलों, घास के मैदानों, मरुस्थलों तथा पानी वाले इलाकों में समूह में रहते हैं। अंगोरा ऊन खरगोश से प्राप्त होता है।

ख़रगोश अपने दिमाग़ में हर जगह का नक़्शा बनाता है और उसको कोई चीज़ इधर से उधर होना पसंद नहीं होता है।

खरगोश ज़मीन के नीचे बिलों में रहते हैं जबकि खरहे ज़मीन पर घास का घोंसला बनाते हैं। खरगोश के बच्चों की जन्म के समय आँखें नहीं खुली होती हैं तथा शरीर पर बाल नहीं होते हैं, जबकि खरहे के बच्चे जन्म से ही देख सकते हैं और उनके शरीर में प्रायः बाल भी होते हैं। खरहे प्राय़ः खरगोश से आकार में बड़े होते हैं, उनके कान भी बड़े होते हैं तथा उनके खाल में काले निशान होते हैं। खरहे अमूमन झुण्ड में रहना पसन्द नहीं करते हैं। खरहे को पालतू नहीं बनाया जा सका है जबकि खरगोश लोगों के घरों में पालतू जानवर के रूप में पाये जा सकते हैं।

तीसरा जानवर

दोस्तों दो जानवर तो आपने आसानी से पता लगा ही लिए होंगे पर आपको तीसरे जानवर का पता लगाने में जरूर काफी ज्यादा मशक्कत करना पढ़ रही होगी। अगर आपको तीसरे जानवर का पता नहीं चल रहा है तो हम आपको बताते हैं कि तीसरा जानवर कहाँ है और कौन सा हैं। हम आपको बता दे कि अगर आप इस फ़ोटो में लाल घेरे में देखेगे तो आप खुद ही पता लगा ही लेंगे। फिर भी आप अगर नहीं समझ पा रहे हैं तो हम आपको बता दे रहे हैं कि वो तीसरा जानवर जंगल का राजा शेर है।

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अब शेर के बारे में भी कुछ दिलचस्प तथ्य जान लीजिये।

शेर

शेर पेन्थेरा वंश की चार बड़ी बिल्लियों में से एक है और फेलिडे परिवार का सदस्य है। यह बाघ के बाद दूसरी सबसे बड़ी सजीव बिल्ली है, जिसके कुछ नरों का वजन २५० किलोग्राम से अधिक होता है। जंगली सिंह वर्तमान में उप सहारा अफ्रीका और एशिया में पाए जाते हैं। इसकी तेजी से विलुप्त होती बची खुची जनसंख्या उत्तर पश्चिमी भारत में पाई जाती है, ये ऐतिहासिक समय में उत्तरी अफ्रीका, मध्य पूर्व और पश्चिमी एशिया से गायब हो गए थे।

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