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अगर पुरुषों का वेतन महिलाओं से ज्यादा हुआ तो होगा अवैध, बन गया है कानून यहाँ, अभी पढ़े

अगर पुरुषों का वेतन महिलाओं से ज्यादा हुआ तो होगा अवैध, बन गया है कानून यहाँ, अभी पढ़े

इस बीच, विश्व आर्थिक मंच की वैश्विक स्तर पर पुरुषों और महिलाओं में भेदभाव पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यस्थल पर इस भेदभाव को समाप्त करने में 80 साल से अधिक का समय लगेगा। ग्लासडोर के सर्वेक्षण में यह जिक्र किया गया है कि महिलाओं और पुरुषों के वेतन में समानता अभी भी एक बड़ा मुद्दा है। वैश्विक स्तर पर इसको लेकर चर्चा होती रहती है।

एक दौर था जब महिलाओं को मतदान करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। उन्हें अपनी हर आवश्यकता को पूरी करने के लिए पुरुषों से संघर्ष करना पड़ता था। पर अब वह जमाना चला गया है अब महिलाएं और पुरुष दोनों बराबर की श्रेणी में आते हैं।
भले ही भारत समेत तमाम देशों में महिलाएं पुरुषों की तुलना में समान वेतन के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन यूरोपीय देश आइसलैंड ने इस दिशा में कड़ा कदम उठाया है।
यूरोप महाद्वीप का आइसलैंड दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है जहां पुरुषों को महिलाओं से अधिक वेतन देना अवैध कहा जाएगा। नए कानून के मुताबिक 25 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियां और सरकारी एजेंसियों को अपनी समान वेतन नीति के लिए सरकार से प्रमाण पत्र लेना होगा।
नए कानून के मुताबिक जो कंपनीयां महिलाओं और पुरुषों के लिए समान वेतन पर काम नहीं करेंगे या नीति नहीं बनाएंगे उन्हें जुर्माना भरना होगा। आइसलैंड वीमंस राइट्स एसोसिएशन की मेंबर ऑफ बोर्ड डैग्नी ऑस्क ने कहा “इसके जरिए अब यह तय किया जाएगा कि महिलाओं और पुरुषों को सामान वेतन मिले” ऑस्क ने कहा ” हमारे यहां यह नियम दशकों से ही रहा है कि पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन मिलना चाहिए लेकिन यह अंतर बढ़ गया है”।

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आइसलैंड में विपक्ष ने भी इस फैसले का स्वागत किया

विधेयक पारित होने के बाद यह कानून ने इस साल की शुरूआत से यानी 1 जनवरी से लागू हो गया है। बीते 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर इस का ऐलान किया गया था।
इस विधेयक का आइसलैंड की गठबंधन सरकार ने स्वागत किया था। इसके अलावा संसद की विपक्षी पार्टी ने भी स्वागत किया था ना 50 फ़ीसदी के करीब सदस्य महिलाएं ही है।

भारत में क्या है स्थिति

भारत में महिलाओं को मिलने वाला वेतन पुरुषों के मुकाबले औसतन 18.8 फीसदी कम है। यह अंतर वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा है और इसका कारण ऊंचे वेतन वाली नौकरियों और इंडस्‍ट्री में महिलाओं की भागीदारी कम होना है। यह बात कोर्न फेरी हे समूह की एक रिपोर्ट से सामने आई है। इसके अनुसार अनुसार वैश्विक स्तर पर महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले 17.6 फीसदी कम वेतन मिलता है, जबकि भारत में यह अंतर 18.8 फीसदी है।

समूह की इकाई पेनेट ने इस रिपोर्ट के सिलसिले में 33 देशों के 80 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के डाटा का अध्ययन किया, जिसमें भारत के 57,000 नौकरीपेशा लोग शामिल हैं। हे समूह के विश्वस्तरीय वेतन मामलों के विशेषज्ञ बेन फ्रोस्ट ने कहा, हमारे आंकड़े के अनुसार जब बात स्त्री-पुरुष के आधार पर वेतन दिए जाने की आती है तो एक ही कंपनी में समान काम करने वाले पुरुष और महिला के वेतन में अंतर होता है। कुछ मामलों में यह समान होता है लेकिन फिर भी इसका झुकाव पुरुषों के पक्ष में 1.6 फीसदी अधिक होता है। भारत में समान काम के लिए यही अंतर साढ़े तीन फीसदी है।

 

फ्रोस्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति स्वीडन से लेकर दक्षिण अफ्रीका तक समान रूप से आंकड़ों में दिखती है। वेतन में अंतर की सबसे बड़ी वजह ज्यादा भुगतान करने वाले उद्योगों में महिलाओं का वरिष्ठ पदों और नेतृत्व करने वाले पदों पर कम होना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल एवं गैस, तकनीक और लाइफ साइंसेज जैसे ज्यादा वेतन देने वाले क्षेत्रों में महिलाओं की संख्या कम हैं। इसके अतिरिक्त कम वेतन वाले क्षेत्र जैसे कि पर्यटन, होटल इत्यादि में भी बड़े और प्रबंधन पदों और ज्यादा वेतन वाले पदों पर पुरुषों का दबदबा है भले ही इस क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व उनसे ज्यादा हो। पे नेट डाटाबेस के पास 110 देशों की 25,000 कंपनियों के दो करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों का ब्यौरा है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2017 के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत का स्थान 108वां है। 2016 में उसका स्थान 87 वा था यानी भारत इस मामले में एक साल में 21 स्थान और नीचे आया है यह इंडेक्स महिला पुरुषों के लिए 4 मानकों पर अच्छा स्वास्थ्य, और जीवित रहना, आर्थिक मौके और राजनीतिक सशक्तिकरण पर आधारित है
भारत में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले 60% ही वेतन मिलता है जबकि वह सामान कार्य करती हैं

महिला पुरूष को समानता देने वाले टॉप 10 देश
1. आइस्लैंड

2. नॉर्वे

3. फ़िनलैंड

4. रवांडा

5. स्वीडन

6. निकरगुआ

7. स्लोवेनिया

8. आयरलैंड

9. न्यूज़ीलैंड

10. फिलीपींस

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