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अगर आप दिखना चाहती हैं अपनी शादी में अप्सरा की तरह तो करें ये उपाय

अगर आप दिखना चाहती हैं अपनी शादी में अप्सरा की तरह तो करें ये उपाय

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शादी जिंदगी में एक बार होती है। और ऐसा कोई शख्स नहीं जो अपनी शादी में सुंदर दिखना ना चाहे। खासकर लड़कियां अपनी शादी में अप्सरा दिखना चाहती हैं।
तो हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जिनसे आप अपनी शादी में बिल्कुल अप्सरा की तरह नजर आएंगी।
ऐसी लड़कियां जिनकी शादी 5 से 6 महीने में होना है। उन्हें खुद को फिट रखने के लिए अभी से तैयारी शुरु करनी चाहिए। उसके लिए उन्हें जिम शुरु कर देनी चाहिए अगर जिम नहीं जा सकते तो अपने घर पर ही एक्सरसाइज शुरु कर देनी चाहिए। डाइटीशियन से संपर्क जरुर करना चाहिए। जिम इंस्ट्रक्टर की हर सलाह माननी चाहिए अगर आप करेंगी ये उपाय तो आप अपनी शादी में अप्सरा से कम नहीं दिखेंगी।

शादी

विवाह’ शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से दो अर्थों में होता है। इसका पहला अर्थ वह क्रिया, संस्कार, विधि या पद्धति है; जिससे पति-पत्नी के ‘स्थायी’-संबंध का निर्माण होता है। प्राचीन एवं मध्यकाल के धर्मशास्त्री तथा वर्तमान युग के समाजशास्त्री, समाज द्वारा अनुमोदित, परिवार की स्थापना करनेवाली किसी भी पद्धति को विवाह मानते हैं। मनुस्मृतिके टीकाकार मेधातिथि के शब्दों में विवाह एक निश्चित पद्धति से किया जाने वाला, अनेक विधियों से संपन्न होने वाला तथा कन्या को पत्नी बनाने वाला संस्कार है। रघुनंदन के मतानुसार उस विधि को विवाह कहते हैं जिससे कोई स्त्री (किसी की) पत्नी बनती है। वैस्टरमार्क ने इसे एक या अधिक पुरुषों का एक या अधिक स्त्रियों के साथ ऐसा संबंध बताया है, जो इस संबंध को करने वाले दोनों पक्षों को तथा उनकी संतान को कुछ अधिकार एवं कर्तव्य प्रदान करता है।

विवाह का दूसरा अर्थ समाज में प्रचलित एवं स्वीकृत विधियों द्वारा स्थापित किया जानेवाला दांपत्य संबंध और पारिवारिक जीवन भी होता है। इस संबंध से पति-पत्नी को अनेक प्रकार के अधिकार और कर्तव्य प्राप्त होते हैं। इससे जहाँ एक ओर समाज पति-पत्नी को कामसुख के उपभोग का अधिकार देता है, वहाँ दूसरी ओर पति को पत्नी तथा संतान के पालन एवं भरणपोषण के लिए बाध्य करता है। संस्कृत में पति का शब्दार्थ है : ‘पालन ‘ तथा ‘भार्या’ का अर्थ है ‘भरणपोषण की जाने योग्य नारी’। पति के संतान और बच्चों पर कुछ अधिकार माने जाते हैं। विवाह प्राय: समाज में नवजात प्राणियों की स्थिति का निर्धारण करता है। संपत्ति का उत्तराधिकार अधिकांश समाजों में वैध विवाहों से उत्पन्न संतान को ही दिया जाता है।

डाइट क्या होती है

जिस आहार में सभी पोषक तत्‍व शामिल होते हैं उसे संतुलित आहार यानी बैलेंस डाइट कहते हैं। संतुलित आहार वो है, जो शरीर के कार्यो के लिए सभी महत्वपूर्ण और आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करे। हम जो भी खाते हैं उसका असर हमारे शरीर पर पड़ता है। जन्‍म के बाद खाद्य-पदार्थ हमारे विकास को निर्धारित करते हैं। यदि बचपन से ही खाने में संतुलित आहार मिले तो शरीर का विकास अच्‍छे से होता है। एक व्‍यक्ति के लिए बैलेंस डाइट के क्‍या मायने हैं, आइए हम आपको इस विडियो के माध्‍यम से बता रहे हैं।

बैलेंस्ड डाइटडाइट

33 प्रतिशत- ढ़ेर सारे फल, सब्जियां, सलाद नियमित रूप से खाएं। यह शरीर के बहुत जरूरी होता है।

33 प्रतिशत- चावल, ब्रेड और पाश्‍ता खाएं। लेकिन यह लिमिट में होना चाहिए। जिससे ठीक से डाइजेस्‍ट हो जाए।

15 प्रतिशत- दूध, दही, पनीर और अन्‍य डेरी प्रोडक्‍ट्स का सेवन करना चाहिए। यह हमारे शरीर को मजबूती प्रदान करते हैं।

12 प्रतिशत- मांस, मछली, अंडे आदि को हेल्‍दी तरीके से खाएं। इससे प्रोटीन भरपूर मिलेगा।

डाइट कैसी लेनी चाहिए

1. सुबह उठकर न्यू पानी में थोड़ी देर बाद ग्रीन टी लें।

2. नाश्ते में उपमा पोहा ओर से आमलेट या फ्रूट जूस लें।

3. लंच में दाल रोटी चावल सब्जी और सलाद ले।

4. डिनर में सब्जी रोटी और सूप लें।

इसके साथ साथ आपको 8 घंटे की नींद जरुर लेनी चाहिए।

ये योगासन करना चाहिए तो मिलेगा फायदा।

1. वशिष्ठासन और अर्धनवासन से कमर के आसपास का फैट कम होगा।

2. मकर अधो मुख आसान से आर्म्स टोन होंगे। साथ ही बेली फैट भी कम होगा।

3. शीर्षासन से पूरे चेहरे पे ग्लो आएगा।

4. मत्स्यासन से चेहरे पर ग्लो के साथ साथ घबराहट भी कम होगी।

ये सारे योगासन सप्ताह में तीन से चार बार जरूर करना चाहिए।

उम्मीद है आपको हमारी पोस्ट पसंद आई होगी। आपको  हमारी पोस्ट कैसी लगी कमेंट में जरूर बताये। और अपने दोस्तों से भी शेयर करना ना भूलें।

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