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अगर आपने अपनी पूँजी जमा करके रखी हैं भविष्य के लिए तो हो जाएँ सतर्क

अगर आपने अपनी पूँजी जमा करके रखी हैं भविष्य के लिए तो हो जाएँ सतर्क

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आजकल बेहतर भविष्य के लिए कोई अपना पैसा कई जगह इन्वेस्ट करता है। जैसे जमीन खरीदने में इन्वेस्ट करना, घर बेचना, म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट करना, ज्वैलरी में पैसा इन्वेस्ट करना, मध्यम वर्ग का व्यक्ति अक्सर ऐसे इन्वेस्टमेंट करता है। अगर आप भी ऐसा करते है तो आपको सतर्क होने की जरुरत है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के बजट में शेयरों और म्यूचुअल फंड्स पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगाने की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने म्यूचुअल फंड्स और शेयर बाजारों के एक लाख रुपये से अधिक के लाभ पर लंबी अवधि में 10 प्रतिशत का कैपिटल गेन टैक्स (पूंजीगत लाभ कर) लगाने की घोषणा की।

आयकर कानून के सेक्शन 10 (38) के तहत अभी 1 साल से ऊपर रखे गए शेयरों से मिलने वाला इनकम टैक्स फ्री है अगर शेयरों की बिक्री के समय एसटीटी (सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स) दिया गया हो। फिलहाल 1 साल से कम समय तक रखे गए शेयरों की बिक्री से होने वाले मुनाफे पर 15 फीसदी की दर से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।

नॉन इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीमों पर 3 साल के बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स टैक्स लगाया जाता है। इसके ऊपर इंडेक्सेशन के बाद 20 फीसदी की दर से एलटीसीजी (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) लगाया जाता है। साल 2004-2005 में ये लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने हटा लिया था।

बजट एक अप्रैल 2018 से प्रभावी होगा, इसलिए अब से लेकर 31 मार्च तक शेयरों की बिकवाली या म्यूचुअल फंड्स के रिडम्पसन (बिक्री) पर किसी तरह की टैक्स देनदारी नहीं बनेगी। लेकिन अगर एक अप्रैल या इसके बाद म्यूचुअल फंड्स रिडम्पसन का आवेदन किया जायेगा तो इस पर 10 फ़ीसदी कैपिटल गेन टैक्स देना होगा, वो भी उस सूरत में जब म्यूचुअल फंड्स पर आपकी कमाई यानी मुनाफ़ा एक लाख रुपये से अधिक हो।

कैपिटल गेन टैक्स

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कैपिटल गेन टैक्स को जानने से पहले हमें यह समझना होगा कि कैपिटल गेन क्या है। कैपिटल गेन (पूंजी लाभ) किसी पूंजी से होने वाला फायदा है। ये पूंजी आपका घर, संपत्ति, जेवर, कार, शेयर, बॉन्ड आदि कुछ भी हो सकता है। ऐसी किसी भी चीज को खरीदने के बाद बेचने से जो लाभ होता है, उसे कैपिटल गेन कहते हैं।

इस कैपिटल गेन को सरकार आपकी इनकम का हिस्सा मानती है और इस पर टैक्स भी लेती है। इस प्रकार निष्कर्ष के रूप में हम कह सकते हैं कि किसी पूंजी यानी संपत्ति को बेचने पर होने वाले लाभ में जो टैक्स लगता है उसे कैपिटल गेन टैक्स कहते हैं।

दरअसल लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन की अवधि अलग-अलग मामलों में अलग-अलग हो सकती है। जैसे अगर कोई सम्पत्ति आप 3 साल तक अपने पास रखकर बेचते हैं तो उसपर लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्‍स लगेगा। अचल संपत्तियों (Immovable Properties) जैसे जमीन, इमारतों, घर आदि के मामले में लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्‍स की समय सीमा वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2 साल कर दी गई है।

चल संपत्तियों (Movable Properties) जैसे आभूषण, बॉन्ड, डेट ओरिएंटेड म्युचुअल फंड आदि के मामले में यह 3 साल ही है। वहीं शेयर के मामले में यह 1 साल की गई है। इसी तरह अलग अलग मामलों में लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन टैक्‍स का रेट भी अलग अलग है।

अब आपको सतर्क रहने की बहुत आवश्यकता है कि आपको अपनी इंवेस्टमेंट को कैसे मैनेज करना है।

म्यूच्यूअल फण्ड क्या होता है?

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निवेशकों की एक बड़ी संख्या के द्वारा जमा पैसा राशी को म्यूचुअल फंड कहते हैं जिसे एक फण्ड में डाल दिया जाता है। फण्ड मेनेजर इस पैसे को विभिन्न वित्तीय साधनों में निवेश करने के लिए अपने निवेश प्रबंधन कौशल का उपयोग करता है।  म्यूचुअल फंड कई तरह से निवेश करता है जिससे उसका रिस्क और रिटर्न निर्धारित होता है।

जब बहुत से निवेशक मिल कर एक फण्ड में निवेश करते हैं तो फण्ड को बराबर बराबर हिस्सों में बाँट दिया जाता है जिसे इकाई या यूनिट कहते हैं।

उदाहरण के लिये

मान लीजिये कि कुछ दोस्त मिल कर एक जमीन का टुकडा खरीदना चाहते हैं। सौ वर्ग गज के जमीन के टुकडे की कीमत एक लाख रुपये है। अब यदि इस फंड को दस रु कि युनिट्स में बांटेंगे तो 10,000 यूनिट बनेंगे। निवेशक जितने चाहे उतने यूनिट अपनी निवेश क्षमता के अनुसार खरीद सकते हैं। यदि आपके पास केवल एक हज़ार रुपये निवेश के लिए हैं तो आप सौ यूनिट खरीद सकते हैं। उसी अनुपात में आप भी उस निवेश (जमीन के) मालिक हो गए।

अब मान लीजिये की इस एक लाख के निवेश की कीमत बढ़ कर एक महीने के बाद रुपये 1,20,000 हो गयी। अब इस निवेश के अनुसार यूनिट की कीमत निकाली जायेगी तो दस रुपये वाला यूनिट अब बारह रुपये का हो चुका है। जिस निवेशक ने एक हजार रुपये में सौ यूनिट खरीदे थे, बारह रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से अब उसका निवेश (100X12) रुपये 1200 हो चुका है।

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